जीवन में सही निर्णय कैसे करें | How to make the right decision in life

प्रत्येक इंसान को अपने जीवन में पल, प्रति-पल निर्णय करने होते हैं।

निर्णय करना निर्णय लेना हमारे जीवन का अभिन्न और अनिवार्य कार्य है। कुछ निर्णय ऐसे होते हैं, जो कम महत्वपूर्ण होते हैं और जिनका प्रभाव काफी सीमित या कम समय के लिए होता है, जबकि जीवन में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं जिनका प्रभाव बहुत व्यापक होता है, और हमारी पूरी जिन्दगी को प्रभावित करता है।

दोस्तो,

निर्णय – उचित निर्णय करना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान कार्य नहीं होता (चाहे व्यक्ति की उम्र कितनी भी क्यों न हो। यह एक कला है।

ऐसा देखा गया है कि, अक्सर लोग निर्णय लेने में काफी समय लगा देते हैं, या जल्दबाजी में गलत निर्णय ले लेते हैं या वो दुविधा में ही रहते हैं और निर्णय ले ही नहीं पाते।

अब प्रश्न यह उठता है कि… 

उचित निर्णय कैसे लें???

दोस्तो,

जब भी हम कोई निर्णय लेना चाहते हैं, तो हमें दो तरह की काल्पनिक चिंताओं का सामना करना पड़ता है –

जो हमने पाया है – उसको खोने का डर !

जो हमें प्राप्त होने वाला है – उसको न पाने का डर !

मतलब, या तो इस बात का डर कि हमने आज तक जो पाया है, कहीं हम वो खो न दें, या हमें भविष्य में जो मिलने वाला है – उसको न पाने का डर (भविष्य की चिंता)

आइये, इस महत्वपूर्ण बात को एक उदाहरण के द्वारा समझने की कोशिश करते हैं…

एक व्यक्ति जिसका नाम अरविन्द है। वह एक प्राइवेट कंपनी में क्लर्क का काम करता है, पर वो मन ही मन व्यवसाय करने के बारे में सोचता है। वह सोचता है की आने वाले समय में वह एक कपड़े का शो-रूम खोलेगा और एक आजाद व शानदार जिंदगी जियेगा।

जैसे ही अरविन्द व्यवसाय के बारे में कोई निर्णय लेना चाहता है उसके सामने दो काल्पनिक समस्याएँ आ जाती है…

वह सोचता है…

अगर, मैंने व्यवसाय शुरू किया – तो मुझे, अपनी इस नौकरी को छोड़ना ही होगा (मतलब अरविन्द के पास है, उसको खोने का डर ) और अगर नौकरी छोड़ दी तो जीवन कैसे जीया जाएगा???

अगर मेरा व्यवसाय नहीं चल पाया तो – फिर मैं क्या करूँगा??? (अर्थात् जो मिलने वाला है, उसको न पाने का डर)

इसी डर में वो कोई भी निर्णय नहीं ले पाता है और उसी कंपनी में क्लर्क की नौकरी करता रहता है।

वो इसी दुविधा में रहता है कि व्यवसाय शुरू करूँ या ना करूँ और वह चाह कर भी इस काल्पनिक डर से बाहर नहीं निकल पाता और कष्ट झेलता रहता है।

यह समस्या अरविन्द की ही नहीं है, बल्कि यह एक आम समस्या है। हम सभी को अपनी-अपनी जिंदगी में इस समस्या का सामना करना ही पड़ता है। यह किसी के भी साथ हो सकता है। उचित निर्णय करना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान काम नहीं है।

 

समाधान

इसका सीधा और सरल समाधान आपके पास ही है। सर्व-प्रथम आपको यह समझना होगा कि इस संसार में कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती है। यदि आपको कुछ चाहिए तो आपको उसकी कीमत चुकानी ही होगी और रही बात जोखिम की तो उसके बारे में इतना ही कहा गया है की..

दोस्तों,

निर्णय – उचित निर्णय लेना एक कला है। ऐसा कहा जाता है की

उचित निर्णय – उचित परिणाम

अनुचित निर्णय – अनुचित परिणाम

स्पष्ट है कि, हम जैसा भी निर्णय लेंगें, परिणाम भी उसी के अनुरूप प्राप्त होगा।

दोस्तो,

उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया

सबसे पहले आपको खुद से यह तय करना होगा कि…

आप क्या पाना चाहते हो? – लक्ष्य तय करना होगा !

इसके बाद आपको अपने लक्ष्य का सबसे उज्जवल पक्ष को देखना होगा!

और साथ ही साथ आपको उसका सबसे निचला पक्ष (बुरे से बुरा) को जानना होगा !

दोनों पक्षों को जानने और समझने के बाद अब आपको स्वयं से यह पूछना होगा की यदि आप अपने लक्ष्य को पाने की दिशा में काम करते हैं और यदि आपको उसका निचला पक्ष (बुरे से बुरा – निचला पक्ष) प्राप्त होता है तो क्या वो आपको स्वीकार होगा???

यदि आपका जबाब हाँ है – तो आप अपने लक्ष्य को पाने की दिशा में पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ जाएं। दुनिया की कोई भी शक्ति आपको अपने लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक सकती।

लेकिन यदि – आपका जबाब नहीं है, तो आपको अपने लिए कोई और लक्ष्य चुनना चाहिए और फिर दोबारा निर्णय लेने की प्रक्रिया दोहरानी चाहये।

अरविन्द ने इस कला को अपने जीवन में अपनाया और अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।

कैसे???

अरविन्द – जो कपड़े का शो-रूम खोलना चाहता है,

अरविन्द का लक्ष्यः कपड़े का शो-रूम

उसका सबसे उज्जवल पक्ष यदि वो अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेगा तो वह एक शानदार और आजाद जीवन का मालिक बन जाएगा। वो अपनी जिंदगी को जैसे चाहेगा वैसे जी सकता है।

निचला पक्ष यदि वो अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाया तो…

उसकी जमा पूंजी डूब जाएगी। यह भी संभव है की लोग उसकी हँसी बनायें।

और उसे फिर से एक नए सिरे से अपनी जिंदगी को शुरू करना पड़े।

अरविन्द को निचला पक्ष स्वीकार था। उसने सोचा कि यदि वह सफल हो गया तो वह जो जीवन जीना चाहता है उससे भी शानदार जीवन जी सकेगा और यदि असफल हो गया तो, क्या हुआ? फिर दोबारा क्लर्क की नौकरी कर लूँगा। जैसी जिंदगी अभी जी रहा हूँ फिर से जी लूँगा।

उसने सोचा की जिंदगी भर खुद से शिकायत करते रहने से अच्छा है की क्यूँ न एक कोशिश की जाए।

उसने व्यवसाय करने का निर्णय लिया और अपने काम में जुट गया।

अरविन्द ने नौकरी के साथ-साथ एक कपड़े के शो-रूम पर पार्ट टाइम काम शुरू कर दिया, धीरे-धीरे वह इस काम के बारे में काफी कुछ सीख गया। जब अरविन्द को यह विश्वास हो गया कि वो यह काम कर सकता है, तो उसने एक छोटी कपड़े की दुकान खोल ली और छोटे स्तर से काम शुरू कर दिया। काम अच्छा चलने लगा। समय बीतता गया। कुछ समय बाद अरविन्द ने कपड़ों का एक शो-रूम खोल लिया।

इस तरह उचित निर्णय लेकर एक क्लर्क आज एक बड़े शो-रूम का मालिक बन गया।

कल तक जो व्यक्ति एक कंपनी में क्लर्क का काम करता था आज वो एक शो-रूम का मालिक है, और आज उसकी दूकान में 20 लोगों का स्टाफ काम कर रहा है। आज वह पूरी तरह से आजाद है और एक शानदार जीवन का मालिक भी।

दोस्तो,

यह कमाल है – एक उचित निर्णय का

यहाँ आप देख सकते हैं की कैसे एक उचित निर्णय एक सामान्य इंसान की जिंदगी बदल सकता है? आपकी पूरी जिंदगी पूरी तरह से आपके निर्णयों पर ही निर्भर होती है। 

दोस्तों,

निर्णय लेने की इस कला को आप किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में अपना सकते हो और जीवन के हर क्षेत्र में अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हो।

आप इसके द्वारा बड़ी ही आसानी के साथ एक आजाद और निडर जीवन पा सकते हो और अपनी जिंदगी को वैसा बना सकते हो जैसा की आप वाकई में बनाना चाहते हो।

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