सफलता के कुछ तत्त्व | Some Elements of Success

 

संसार के हर छोटे बड़े व्यक्ति चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या वर्ग के क्यों न हो हर क्षण अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाना चाहते हैं। इसके लिये किया जाने वाला प्रयत्न जब फलदायक होता है तब हम उसे सफलता के नाम से पुकारते हैं।

जीवन में सफलता प्राप्त के लिये ये तीन तत्त्व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। पहला तत्त्व हैं, व्यक्ति जो किसी कार्य में सफलता पाने के लिये कटिबद्ध है। कुछ विशिष्ट गुणों के कारण वह व्यक्ति साधक कहलाता है। दूसरा आवश्यक तत्त्व वह साधन है, जिसकी आवश्यकता कार्य पूरा करने के सिलसिले में साधक को होती है। उपयुक्त साधन के बिना सुयोग्य साधक भी अपना काम अच्छी तरह नहीं कर पाता और असफल हो जाता है। 

कार्य की सफलता के लिये साधक को अपने गुणों का उपयोग करते हुए उपयुक्त साधनों का सहारा लेकर तन-मन और धन से पूरी तन्मयता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अपने काम में लगातार परिश्रम पूर्वक तबतक लगा रहना पड़ता है जबतक कि उसे अपने काम में सफलता नहीं मिल जाती है या उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता है। यही सफलता का आवश्यक तीसरा तत्त्व साधना है।

यह सही है कि संसार के अधिकांश व्यक्ति न तो बहुत गुणवान होते हैं और न उनके पास पर्याप्त साधन ही होता है। ऐसा गुणहीन और साधनहीन व्यक्ति समुचित साधना के लिये भी तत्पर नहीं हो पाता। ऐसे व्यक्तियों का जीवन निराशा, कष्ट और अवसाद में बीत जाता है। ईश्वर ने हर मनुष्य को बुद्धि दी है। साधन प्राप्त करने के लिये हाथ और पैर दिये हैं। आवश्यकता स्थिर चित होकर काम में जुट जाने की है, सामान्य रूप से जीवन को सुखी बनाने का यही रास्ता है।

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