Jivitputrika Vrat 2023 जिउतिया व्रत जाने इस व्रत का महत्व

आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि के दिन महिलाएं जिउतिया व्रत रखती है। इस व्रत में महिलाएँ की विशेष आस्था है यह व्रत महिलाएँ अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। जिउतिया का व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो महिलाएँ इस व्रत को रखती हैं उनके बच्चों के जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है और उन्हें संतान वियोग नहीं सहना पड़ता है

इस व्रत को करने का नियम इस प्रकार है व्रत के दिन महिलाएँ निर्जला रहती है बिहार, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह त्योहार खास तौर पर मनाया जाता है। यह व्रत तीन दिन का माना जाता है। पहला दिन पहले नहायखाय के साथ जिउतिया व्रत शुरू होता है। इस दिन महिलाएं पितृों का पूजन कर उनकी लंबी आयु की भी कामना करती हैं। इस व्रत को करते समय केवल सूर्योदय से पहले ही खायापिया जाता है सूर्योदय के बाद पानी भी नहीं पी सकते हैं।

उसके उपरांत नवमी के दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है। इस व्रत में सूर्योदय से पहले भी मीठा ही भोजन किया जाता है। इस व्रत में माता जीवित्पुत्रिका और राजा जीमूत वाहन दोनों की पूजा एवं पुत्रों की लम्बी आयु के लिए प्रार्थना करती है। सूर्य को अर्घ् देने के बाद ही कुछ खाया पिया जाता है। इस व्रत में तीसरे दिन चावल, मरुवा की रोटी और नोनी का साग भी खाए जानें की परंपरा है। इस व्रत को महिलाएँ वहुत नियमपुर्बक करती है। जिससे उनकी संतान की लम्बी आयु हो सके।

व्रत की पौराणिक कथा

प्राचीन समय की बात है। एक महिला ने जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन बासी मुंह भोजन कर लिया। उस दिन जीवित्पुत्रिका व्रत था। परिणाम यह निकला कि महिला के बेटे को एक विशालकाय सर्प ने निकल लिया। बेटे के वियोग में महिला ने दूसरे साल दोबारा जीवित्पुत्रिका व्रत किया। विधि विधान से व्रत पूरा करने के बाद बेटा जिवित होकर घर लौट आया।

 

जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन महिला ने भूलवश भोजन कर लिया। महिला का बेटा जंगल गया तो उसे एक विशाल काय सर्प ने निगल लिया। देर शाम तक बेटा घर नहीं लौटा। गांव के लोगों ने महिला को बताया कि उसके बेटे को सर्प ने निगल लिया है। वह मर चुका है अब दोबारा लौटकर नहीं आएगा। देर रात महिला को उसके बेटे ने स्वप्न दिखाया। बेटे ने कहा मां तूमने जितिया के दिन चावल का माड पी लिया। जो कि बहुत गलत बात है। मां ने बेटे से माफी मांगते हुए उपाय पूछा।

 

बेटे ने बताया कि मां अगले साल तुम पूरे विधि विधान के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत करना। पारण के दिन मुंह हाथ धोकर दोबार चावल का माड पीना। एक साल बीत गया। खर जिउतिया पर्व भी आया। महिला ने व्रत किया। बेटे के कहे अनुसार मां ने पारण करते समय चावल का माड पीया। महिला ने माड को फूंक-फूंककर पीया। माड खत्म होते ही महिला का मृत बेटा जीवित हो उठा। इसलिए इसे जीत्वपुत्रिका या खर जिउतिया व्रत कहा जाता है।

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