Know interesting facts about Purushottam month (Malamas) पुरुषोत्तम मास (मलमास) के बारे में जानें रोचक तथ्य

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकशिपू ने वरदान मांगा था कि मैं 12 महीनों में किसी भी माह में नहीं मारा जाऊंगा, न दिन को, न रात को इसी कारण भगवान को उसे मारने के लिए नृसिंह अवतार इसी माह में लेना पड़ा। जिसे बारह मास में नहीं गिना जाता। इस मास में इस मंत्र का जाप बहुत हीं लाभकारी माना गया है ‘ऊँ भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश मंत्र का जाप करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। क्योंकि इसी मंत्र जाप भक्त प्रह्लाद ने किया था तब जाकर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार में आयें।

सनातन धर्म में पौराणिक गणना के अनुसार एक सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है। जबकि चन्द्रमा का एक वर्ष 354 दिनों का होता है। दोनों में 11 दिनों का अंतर होता है। इसी कारण हर 3 साल में पुरुषोत्तम मास (मलमास) आता है जो इस गणना की कमी को पुरा करता है। पुरुषोत्तम मास के समय सभी तीर्थ ब्रज के क्षेत्र में निवास करते हैं। यह ब्रज क्षेत्र ब्रजवासियों के लिए बहुत हीं शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने कृष्ण से अधिक मास की चर्चा करते हुए कहा था कि शेष मास इसका उपहास करते हैं कि ये बचे हुए दिनों से बनकर तैयार हुआ है। इसका कोई देवता भी नहीं। तब कृष्ण ने इसे अपनाया और ब्रज क्षेत्र में बसाया। उन्होंने बहुत सारे पर्व भी मनायें। इसी वजह से पुरुषोत्तम मास में जो त्यौहार 3 वर्षों में नहीं मनाए हों वे त्यौहार हम मना सकते हैं। जैसे कि वसंतोत्सव अर्थात् होली का उत्सव, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, गिरिराज जी का पूजन, श्रीनाथ जी का पूजन, अन्नकूट, दीपावली और देवउठनी एकादशी भी मनाया जा सकता है। इस महीने सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करते हैं और इस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होने के कारण नवग्रह की पूजा नहीं कि जाती और हर वो पूजन जिसमें नवग्रह पूजा का विधान है इस माह वर्जित है। भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान, विशेष रुप से भागवत पाठ, रामायण पाठ, हरिवंश पुराण पाठ आदि करना विशेष लाभ देने वाला माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास (मलमास) में ऐसा करने से विशेष लाभ मिलता है

  • ब्रह्मा मुहूर्त में स्नान और दान का भी विशेष महत्व माना गया है।
  • चावल द्वारा शंख का पूजन किया जाता है जो माता लक्ष्मी आगमन के लिए शुभ माना जाता है।
  • घर में संपन्नता के लिए और पारिवारिक दोषों को दूर करने के लिए तुलसी पौधे पर गाय के घी का दीपक जलाते हैं साथ हीं परिक्रमा करते हुए ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का उच्चारण करना बहुत ही लाभकारी माना गया है।
  • इस माह में प्रतिदिन विष्णु के नृसिंह स्वरुप का पूजन करने से सुख-समृद्धि आती है।
  • पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है जिन लोगों पर अधिक कर्ज है, मान्यता है कि वे पीपल के वृक्ष पर पुरे महीने यानि कि 30 दिनों तक जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें और विष्णु मंत्र का जाप करने से स्थिति बेहतर हो जाती है।

 

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