Learn how to make Shiva Tandava Stotra by Ravana! रावण द्वारा शिव तांडव स्त्रोत्र कैसे बना जानिए!

रावण शिवजी के महान भक्त में से था उनके बारे में अनेक कहानियां प्रचलित हैं। वह एक महान भक्त था वह दक्षिण से इतनी लंबी दूरी तय कर कैलाश आया इतनी लंबी दूरी चल के आना और वो शिवजी की प्रशंसा में स्तुति गाने लगा। उसके पास एक ड्रम था, जिसकी ताल पर उसने तुरंत ही 1008 छंदों की रचना कर डाली, जिसे शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। उसके संगीत को सुन कर शिवजी बहुत ही आनंदित मोहित हो गये। रावण गाता जा रहा था, और गाने के साथसाथ उसने दक्षिण की ओर से कैलाश पर चढ़ना शुरू कर दिया। जब रावण लगभग ऊपर तक चढ़ गया, और शिवजी उसके संगीत में मंत्रमुग्ध हो गए थे, तो पार्वतीजी  ने देखा कि एक व्यक्ति ऊपर रहा है।

शिखर पर केवल दो ही लोगों के लिये ही जगह है। तो पार्वतीजी ने शिव को उनके हर्षोन्माद से बाहर लाने की कोशिश की और वे बोलीं, “वो व्यक्ति बिल्कुल ऊपर ही गया है लेकिन शिव अभी भी संगीत और काव्य की मस्ती में लीन थे। आखिरकार पार्वतीजी उनको संगीत के रोमांच से बाहर लाने में सफल हुईं। और जब रावण शिखर तक पहुंच गया तो शिव ने उसे अपने पैर से धक्का मार कर नीचे गिरा दिया। रावण, कैलाश के दक्षिणी मुख से फिसलते हुए नीचे की ओर गिरा। ऐसा कहा जाता है कि उसका ड्रम उसके पीछे घिसट रहा था और जैसेजैसे रावण नीचे आता गया, उसका ड्रम पर्वत पर ऊपर से नीचे तक, एक लकीर खींचता हुआ गया। अगर आप कैलाश के दक्षिणी मुख को देखें तो आप बीच में से ऊपर से नीचे की तरफ आता एक निशान आज भी देखा जा सकता है।

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