कोणासन | Konasana

शरीर को एड़ियों के सहारे धरती से 450 का कोण बनाते हुए सर एवं कंधों को बाजुओं की सहायता से ऊपर ताने रहने के कारण इस आसन को काणासन कहते हैैं।

विधि-

बाजुओं को पीठ की ओर मोड़कर एड़ियों को मिलाकर भूमि से टिकाए और बाजुओं को पंजो की सहायता से सर एवं कंधो को ऊपर उठाएँ। कमर को तानकर ऊपर उठाएँ। सर गर्दन पीछे करके लटकाए। एड़ियों और पंजो को मिलाएँ। पाँवों के तलवे भूमि से चिपके रहने चाहिए। हाथों के पंजे भूमि पर चित्रनुसार होने चाहिए।

ध्यान-

इस आसन में ध्यान को मणिपुर चक्र में केन्द्रित करना चाहिए।

लाभ-

कंधे व बाजू मजबूत होते है। पेट की सख्ती दूर होती है। मेरुदंड का व्यायाम होता है। नस-नाड़ियाँ स्वाभाविक स्थिति में आ जाती हैं।

सावधानियाँ-

  1.  उत्तर दिशा की ओर सिर करके आसन न लगाएँ।
  2.  शरीर के अंगों का संचालन धीरे-धीरे करें और अभ्यास के द्वारा आसन लगाने में सफलता प्राप्त करें।

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