ज्ञानमुद्रा आसन | Gyanmudra Posture

विधि-

तर्जनी उँगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में, बीच में या सिरे पर लगाइए। शेष तीनों उँगलियों को मिलाकर फैलाइए। सुखासन, पप्रासन या सिद्धासन की मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।

ध्यान-

यह चिन्तन करने का आसन है। किसी विषम या उलझन से भरे विषय पर सोचना हो, तो यह मुद्रा उसमें अप्रत्याशित सहायता करती है। अनेक भारतीय ऋषि दार्शनिकों ने दार्शनिक तथ्यों का चिन्तन इसी मुद्रा में किया है।

लाभ-

मानसिक शान्ति, एकाग्रता का विकास, विचारों की तारतम्यता का विकास।

सावधानी-

मुँह उत्तर दिशा की ओर करके यह आसन न लगाएँ।

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