दिपावली पर निबंध | Essay on Deepawali

दिपावली हमारे देश भारत में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। दिपावली को पूरे भारत में बहत ही धूमधाम से मनाते हैं। दिपावली सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर रहने वाले सभी भारतीय और अन्य लोग भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं। दिपावली का त्यौहार हर किसी के लिए खुशियों का त्यौहार हैं, क्या बड़ा, क्या छोटा, हर कोई इस त्यौहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाता है। अक्टूबर या नवम्बर की माह में होने वाला यह त्यौहार पूरे साल में एक बार आता है। दीपावली आते ही लोग अपने घर की साफ-सफाई भी करते है। नए कपड़े पहनते है, मिठाईयाँ बांटते हैं, दीप जलाते है, पटाखे जलाते हैं, माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा करते हैं।

इस त्यौहार का हिंदू धर्म के लोगों को बहुत हीं इंतजार होता है। दीपावली भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। सभी परिवार मिलकर इस त्यौहार को मनाया करते हैं। इस त्यौहार के बारे में प्रचलित कथा इस प्रकार है। भगवान राम द्वारा रावण को पराजित करने के बाद उन्होंने 14 साल के लंबे समय के बाद अयोध्या लौटे थे। लोग आज भी इस दिन को बहुत ही परंपरिक तरीके से मनाते हैं। भगवान राम के लौटने वाले दिन, अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और रास्ते को बड़े उत्साह के साथ अपने भगवान का स्वागत करने के लिए दिपों से प्रकाशित किया था। इसलिए यह पर्व दीपावली के नाम से विख्यात हुआ। दीपावली एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 

दीपावली के दिन प्रत्येक घरों एवं दुकानों को रोशनी से सजाया जाता है ताकि वह इससे एक अद्भुत त्यौहार दिख सके। दीपावली के दिन बाजारों में विशेष रौनक होती है। दिपावली के दिन विशेष रूप से मीठाई की दुकानें पर बहुत ही भीड़ होती। बच्चों के लिए बाजारों से नए कपड़े, पटाखे, मिठाई खरीदारी करते हैं। लोग अपने घरों के साथ-साथ गली मोहल्ले को साफ करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यास्त के बाद ही लोग माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। और अपने स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना माता लक्ष्मी और गणेश से करते हैं। सभी घरों में तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं। और माता लक्ष्मी को भोग लगाते है। 

दीपावली से दो दिन पूर्व त्रयोदशी के दिन धनतेरस कहा जाता है। इस दिन आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरी की पूजा की जाती है जिसे धनतेरस के रूप में जाना जाता है। इस दिन बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं। दर्जियों की दुकानों में भी भीड़ लगी रहती है। इस शुभ अवसर पर लोग नए-नए वस्त्र पहनते हैं। इस प्रकार दीपावली उत्सव का पहला चरण सफाईए साज-सजावट और नए वस्त्रों और बर्तनों के क्रय से आरम्भ होता है। दूसरे दिन छोटी दीपावली के रूप में जाना जाता है जिसे भगवान कृष्ण की पूजा करके मनाया जाता है क्योंकि उन्होंने राक्षसराज नारकसुर को मार डाला था। तीसरे दिन दीपावली मनाया जाता जिसमें शुभ मुहूर्त में पूजा किया जाता है। पूजा के उपरान्त पटाखे बजाते है। और खुशी का इजहार करते है।

दीपावली भारतवर्ष का सांस्कृतिक पर्व है जो नवजीवन को नई स्फूर्ति देता है, संस्कृति को संजोय रखता है तथा सभी को ये संदेश देता है कि हमारा पुनीत कर्तव्य है कि कुप्रवृतियों को त्याग कर इस पावन त्यौहार की पावनता बनाए रखें। और समाज में मिलजूल कर रहें। यही हमारी मानवता होने का परिचायक है।

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