पद्मासन | Padmasana

‘पद्म’ का अर्थ कमल है। अनेक योगियों का कथन है कि इस आसन के पूरा होने पर शरीर की मुद्रा एक कमल जैसी होती है। इसलिए इसे पद्मासन कहते हैं। यह भी अर्थ ठीक है, लेकिन वस्तुतः इसे पद्मासन इसलिए कहते है इसमें बैठकर मनुष्य अपने चेतनारूपी कमल को विकसित करते हैं।

पद्मासन योग-

साधना का एक विशिष्ट आसन है। इसमें शरीर की उन सभी पेशियों का व्यायाम हाता है, जो प्रयोग में न आने के कारण दृढ़ हो गई होती हैं। इसके साथ ही यह मस्तिष्क में शुद्ध रक्त प्रवाहित करने की प्रक्रिया तेज कर देता है। यही कारण है कि ध्यान लगाने के लिए इस आसन को सर्वोत्तम माना जाता है।

विधि-

भूमि पर बिछे कम्बल या दरी को चार परतों में मोड़ कर बिछा लें। उस पर दोनों टाँगों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए। अब दायी टाँग को पिंडली और पैरों से पकड़कर धीरे-धीरे घुटने पर से मोड़े। 900 कोण के बाद टाँग को मोड़ने में कठिनाई होती है। अब दाहिने पैर को गठ्ठे और पंजे को चित्रनुसार पकड़ें और दाहिनी टाँग को थोड़ा ऊपर उठाते अन्दर की ओर खींचिए। इसके अभ्यास में भी समय लगता है। दाहिने पैर की एड़ी बाँई जाँघ की जड़ से लगाकर कस लें। अब बाँई टाँग को घुटने से मोड़कर (देखे चित्र) गठ्ठे को बाएँ हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाइए। बाएँ पैर की एड़ी को दाँई जाँघ की जड़ से सटा दीजिए। फिर ज्ञानमुद्रा में उँगलियों को करके घुटनों पर रखिए।

पद्मासन में ध्यान-

पद्मासन की अवस्था मानसिक एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम समझी जाती हैं। इसमे ‘ध्यान’ लगाकर दार्शनिक, व्यावसायिक, राजनीतिक,पारिवारिक किसी भी जटिल समस्या का हल ढूँढ़ा जा सकता है। शर्त केवल यह है कि आपको इस आसन में ध्यान को एकाग्र करने का पूर्ण अभ्यास हो।
त्रटक के अभ्यास में इसी आसन का प्रयोग किया जाता है त्रटक साधना के कई सोपान हैं। केवल किसी बिन्दु पर ध्यान को एकाग्र करके ही अप्रत्याशित मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके पश्चात् आँखें बंद करके अंधेरे में ज्योति-बिन्दु को खोजने का अभ्यास किया जाता है। इसके सात सोपान हैं। इसके बाद इस ध्यानाभ्यास का प्रयोग कुंडलिनी को जागृत करने में किया जाता है।

लाभ –

यदि आप केवल पद्मासन लगाकर व्यायाम करते हैं और ध्यान नहीं लगाते, तो आपको वात-रोग, पेट-रोग, गठिया, कब्ज आदि रोगों में आशातीत लाभ होगा।
यदि इस आसन में ध्यान लगाते हैं, तो इसके असीमित लाभ हैं। ध्यान के एक उच्च स्तर पर आप में अलौकिक शक्तियों का समावेश हो सकता है। शरीर की सुघड़ता, कान्ति, दीर्घ यौवन सहज में ही प्राप्त होते हैं।

सावधानियाँ –

  1.  उत्तर की ओर मुँह करके न बैठें।
  2.  समतल भूमि पर आसन लगाएँ।
  3.  मोटे थुलथुले व्यक्ति को पहले शरीर को सुडौल बनाने और मोटापा दूर करने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए।
  4.  यह आसन थोड़ा कठिन है। किसी काम में जल्दबाजी न करें प्रत्येक पैर को मोड़ने का अभ्यास धीरे-धीरे करें।
  5.  रात में दानों पैरों के गठ्ठे पर सरसों के तेल की मालिश करें।
  6.  पहले 5 सेकेण्ड से प्रारम्भ करके सामान्य साधक को इस आसन को 15 मिनट तक करना चाहिए।

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