ब्रह्मांजलि | Brahmajjani

विधि –

सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएँ। बाएँ हाथ की हथेली को एड़ी के ऊपर ऐसे रखें कि वह नाभि से नीचे रहे। अब दायें हाथ की हथेली को बायी हथेली पर रखिए ।

ध्यान –

ब्रह्मांजलि की मुद्रा सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में बनाकर त्रटक बिन्दु को केन्द्रित करने का अभ्यास किया जाता है।

लाभ –

ब्रह्मांजलि एक मुद्रा मात्र हैं। इसे विभिन्न आसनों में प्रयोग किया जाता है। इससे शरीर के और चक्र का हथेलियों में मिलाप होता है और यह शक्ति मस्तिष्क को मिलती है।

सावधानियाँ-

  1.  उत्तर दिशा की ओर रूख करके आसन न लगाएँ।
  2.  हथेलियों एवं बाहों को ढ़ीला रखें।

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