लाइफस्टाइल के नये रंग | Lifestyle Colors

आजकल लोगों में जिंदगी जीने के तरीके और हर कामों को करने के तरीके पहले से काफी कुछ बदल गया है और हम उन बदलावों के बीच खुद को एडजस्ट करने में लगे हैं। वैसे तो कुछ बदलाव अच्छे होते हैं, और कुछ जरूरी भी होते हैं। कुछ तरीके हमें तनाव देते हैं, तो कुछ तरीके मजबूरी भी होते हैं। पर यह तो जिंदगी न ही रूकती है बस इसी तरीके से चलती रहती है हर पल बस हर पल। इसे ही तो जिंदगी (लाइफस्टाइल) कहते हैं। इन बदलावों के बीच सामंजस्य बैठाने के तौर-तरीकों को हम लाइफस्टाइल का नाम दे देते हैं। इस लाइफ में रोज नये-नये तरीके, हर पल कुछ नया जुड़ता जा रहा है। बहुत कुछ तेजी से बदलता जा रहा, ऐसै ही विषय को हम समझने का प्रयास करेंगे। इससे हम अपने जीवन में बदलाव की प्रक्रिया को सरलता से ले सकें और अपनी लाइफस्टाइल को भी बेहतर बना सकें। क्योंकि इसके बिना हम अपने लाइफस्टाइल को नहीं बदल सकते। आइयें जानते हैं इसके बारे मेंं।

लेटेस्ट लुक्स

लाइफस्टाइल के नये रंग | Lifestyle Colors
आज हम देखतें है कि हर लोगों की जरूरतें, उनके रहन-सहन, खान-पान एवं पहनावा में हर पल तेजी से बदलाव आ रहा है। इसी बदलाव को हम लेटेस्ट व हॉट लुक्स क्रेज का नाम दे सकते है। आज की लाइफस्टाइल में अगर आपके पास लेटेस्ट लुक्स नहीं है तो, आपकी जिंदगी दुसरे की नजर में बेकार है। यही वजह है कि लोग कभी अपने लुक्स के साथ, तो कभी अपने स्टाइल के साथ बदलाव करने में लगे हैं। इसके साथ हीं हेयरस्टाइल और हेयरकलर्स में भी तरह-तरह के लेटेस्ट लुक्स अपना रहे हैं तो कभी गांव की गंवईत और उसके साथ-साथ चलने का स्टाइल, तो कभी कपड़े का पहनावा हर अंदाज हर चीज में लेटेस्ट लुक्स जरूरी हो गया है। आज का युवा पीढ़ी तो ऐसे लेटेस्ट लुक्स से बहुत ही खुशी महसूस करते हैं जैसे की उनकी हर इच्छा पूरी हो गई हो।

रिलेशनशिप में लेटेस्ट लुक्स
आज के युवा पीढ़ी लिव इन में विश्वास करने लगें हैं। वे चाहे एक्स्ट्रा मैरिज अफेयर में हो या फिर लिव इन में रह रहें हो। उनको न ही इसमें कोई संकोच है न ही कोई डर, उनको लगता है कि इसमें छुपाने की क्या बात है। आखिर हमारी लाइफ है, हमें चाहे जैसे जीये, लोग क्या कहेंगे इन सब बातों का डर अब लोगों के मन से काफी हद तक निकल चुका है। वो जानते है कि बड़े शहर में ऐसे बाते से हमें न ही काई डर है न कोई शर्म। यही कारण है कि वे अपने जीवन को अपने मर्जी से जीना चाहते है। शर्म-संकोच आज के समय में बेबकूफी की निशानी मानी जाने लगी है। इसके साथ ही ज्यादा बोलना, हर बात में खुलकर बोलना यह अपने आप में स्मार्ट कहलाने को प्रेरित करता है। आज से कम बोलने वाले और शर्म-संकोची वाले इंसान को लोग संस्कारी मानते थे, लेकिन बदलती रिलेशनशिप ने संस्कारों के मायने भी बदल दिए हैं। आप अगर कम बोलते हैं या शर्म-संकोची हैं, तो आपको पर्सनैलिटी डेवलेपमेंट क्लासेस जाने की सलाह भी मिलते देर नहीं होगी।

सेक्सशुअल रिलेशनशिप

लाइफस्टाइल के नये रंग | Lifestyle Colors
आजकल लोगों का मानना है कि जैसे हम जीवन में खाने, पीने से लेकर सोने, तक जीवन जीते हैं वैसे ही सेक्स जीवन और सेक्सशुअल रिलेशनशिप, इसमें शर्माने की बात बिलकुल ही जायज नहीं हैं जी हां, आजकल अधिकांश लोग यही मानते हैं। सेक्स अब संकोची या प्राइवेसी का विषय नहीं रहा। आज के लोग उस पर खुलकर बात भी करते हैं और इसे बुरा भी नहीं मानते। इसको इस तरह से कह सकते हैं कि सेक्स को लेकर थोड़ी मैच्योरिटी तो आई है और समाज में लड़कियां भी काफी हद तक इसे सहजता से लेने लगी हैं। उनका ऐसा मानना है मूल जरूरतों पर शर्माना कोई बात नहीं ऐसा लोग मानने लगे हैं। आज की पीढ़ी सेक्स को गंदा या बेशर्मी न मानकर अपने जीवन की जरूरी चीज के साथ-साथ आवश्यक भी समझने लगे हैं, यही वजह है कि अब वो खुलकर उस पर बात भी कर रहे हैं। इसकी जरूरत भी है, जिससे सेक्स संबंधी अन्य मानसिक व शारीरिक समस्याओं का निवारण आसानी कर सके।

पीरियड्स पर भी खुल कर चर्चा
ज्यादातर महिलाएं माहवारी (पीरियड्स) की समस्याओं से परेशान रहती है लेकिन अज्ञानतावश या फिर शर्म या झिझक के कारण लगातार इस समस्या से जूझती रहती है। आज की युवा पीढ़ी पीरिड्स पर भी खुलकर बात करना, इसके बारे में चर्चा करना और पीरियड्स के बारे में भी सहजता से लेने लगे हैं। युवा पीढ़ी का कहना है कि ये तो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, ऐसे में इसमें शर्मिंदगी या संकोच का कोई स्थान ही नहीं होना चाहिए। इनसे जुड़े कई लड़कियां व कई संस्थाएं भी आगे आकर अपने कैंपेन चला रही हैं जो लोगों में जागरूकता ला रही हैं। वास्तव में समाज में एक ऐसे बदलाव की जरूरत भी है। जिसमें औरतों और लड़कियों को अपनी परेशानियों को पूरी तरह से सबके सामने लाने में मदद हो सके।

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