उत्काटासन | Utkatasan

यह आसन हवा में नितम्ब को स्थापित करके बैठने की मुद्रा में लगाया जाता है।

विधि-

  1. दरी या कम्बल पर सीधे खडे़ हो जाइए। मुद्रा ‘सावधान’ की रहनी चाहिए। दोनों हाथ कमर पर रखिए। घुटनों को मोड़ते हुए कुर्सी पर बैठने की मुद्रा बनाइए। जाँघाें पर घुटनों की स्थिति सम रेखा में होनी चाहिए। घुटने और पैरों के अंगूठे सम रेखा में हो अर्थात् घुटनों पर 750 का कोण बनना चाहिए।
  2. सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को सिर पर रखें। धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए रेचक कीजिए। झुकते हुए नितम्बों को एड़ियों पर रखकर बैठ जाइए। पूरक करते हुए उठिए।

ध्यान-

दूसरी विधि के उत्काटासन में पीठ के मध्य रीढ़ की हड्डी, हृदय और त्रटक बिन्दु पर ध्यान एकाग्रचित करें।

लाभ-

कमर-दर्द, साइटिका, गठिया, हार्निया, पथरी आदि व्याधियों में इस आसन से आशातीत लाभ होता है। पिंडलियाँ, कमर, घुटने, जाँघों आदि की हड्डियों और पेशियों में मजबूती तथा लचीलापन आता है।

सावधानियाँ –

  1.  उत्तर की ओर मुँह करके आसन न लगाएँ।
  2.  आसन का अभ्यास धैर्य के साथ करें।

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