उत्तानपादासन | Uttanapadasana

यह आसन पीठ के बल लेटकर पाँवों को ऊपर उठाकर लगाया जाता है। इसलिए इसे उत्तानपादासन करते है।

विधि-

भूमि पर आसन बिछाकर पीठ के बल चित्त लेटकर दोनों हथेलियों को जाँघों के पास भूमि से लगाकर बाहों को शरीर के साथ लगाकर रखिए। लम्बी साँस खींच कर कुम्भक कीजिए। हथेलियों पर दवाब डालते हुए टाँगों को एक-दूसरे से सटाकर सीधे ऊपर की ओर उठाइए। टाँगों की स्थिति शरीर से 1200 के कोण पर रखें।
पूरक करके कुम्भक लगाएँ। जितनी देर साँस रोक कर इस आसन को लगाए रख सकते हैं, लगाए रखिए। इसके पश्चात् रेचक करते हुए पैरों को भूमि से लगाइए। शवासन में विश्राम कीजिए।
प्रारम्भ में टाँगों को थोड़ा ही ऊपर उठाइए। धीरे-धीरे उसे भूमि से दूर उठाते जाएँ। भूमि से 600 और शरीर से 1200 का कोण अभ्यास के बाद ही बनता है।

ध्यान-

यह शारीरिक व्यायाम का एक आसन हैं। इसमें ध्यान नहीं लगाया जाता है।

लाभ –

पेट की गैस, कब्ज, हार्निया, कमर-दर्द आदि को दूर करके यह आसन पेट की नस-नाड़ियों एवं अमाशय को बल प्रदान करता है। टाँगों एवं कमर के जोड़ों को लचीला और मजबूत बनाता है। इनकी पेशियाँ एवं कमर के जोड़ों को लचीला और मजबूत बनाता है। पेट की चर्बी कम करता है।

सावधानियाँ-

  1.  पूर्व दिशा की ओर सिर करके आसन लागाएँ।
  2.  टाँगों को ऊपर उठाने में धैर्य के साथ अभ्यास करें। इसी प्रकार गिराने में भी धीरे-धीरे नीचे लाएँ।

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