उर्ध्वपद्मासन | Oordhv padmaasana

विधि-

जमीन पर मुलायम कपड़ा गोल लपेटकार सिर को कपड़े पर रखकर दानों हाथों के तलों की ऊँगलियाँ फसाकर भूमि पर उल्टा खड़ा हुआ जाता है। पैरों को सीधा ऊपर न रखकर हवा में पद्मासन की शक्ल में मोड़ा जाता है। इस आसन में कोहनियों से आगे को हाथ व सिर ही भूमि का स्पर्श करता है और सारा बोझ सिर पर आ जाता है आरम्भ में यह क्रिया दीवार के सहारे की जा सकती है।

लाभ-

इस आसन से त्रिदोषों का नाश होता है। रक्त की शुद्धि होती है। मस्तिष्क को बल मिलता है। जठराग्नि बलवान होती है। कब्ज का नाश होता है। सिरदर्द, थकान, जुकाम आदि दूर होती है। नेत्रें की ज्योति बढ़ती है। शरीर में ओज तथा वीर्य की वृद्धि होती है।

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