नाभिकादर्शनासन | Navhikadarsnasan

इस आसन को लगाकर नाभी को देखते हैं। इसलिए इसे ‘नाभिकादर्शनासन’ या ‘नाभिकादर्शनासन’ कहते हैं।

विधि-

भूमि पर कम्बल या दरी बिछा लीजिए। टाँगें सामने की ओर फैला लीजिए। दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाकर हथेलियों को भूमि पर टिका दीजिए।
पूरक करते हुए नितम्बों को ऊपर उठाकर एड़ियों एवं हथेलियों पर भार डालते हुए शरीर को ऊपर उठाइए। शरीर को इतना ऊपर उठाइए कि पैरों के पास भूमि से 300 का कोण बन जाए। कुम्भक लगाते हुए गर्दन को ऊपर उठाइए और अपनी नाभी को देखिए। जितनी देर सरलता से साँस रोककर इस आसन को लगाए रख सकते हैं। आसन पूरक करते हुए तोड़े और शवासन में विश्राम कीजिए।

ध्यान-

इस आसन में नाभि पर ध्यान लगाएँ।

लाभ-

मधुमेह के रोग में यह आसन लाभप्रद है। हाथ-पैरों की नसें पेशियाँ, नाड़ियाँ स्वस्थ और मजबूत होती है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती हैं। आँखों की रोशनी बढ़ती है। नाभि कमल का ध्यान हृदय को प्रफुल्लित करके तन-मन में स्फूर्ति प्रदान करता है।

सावधानियाँ-

  1.  उत्तर की ओर सिर करके आसन न लगाएँ।
  2.  अभ्यास करने से ही कमर सीधी ऊपर उठती है। स्मरण रखें। टाँगों के घुटने न मुड़ने पाएँ ।

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