सिंहासन | Sinhaasan

शरीर की मुद्रा को सिंह के शरीर की भाँति बना कर आसन लगाने को सिंहासन कहते हैैं।

पहली विधि-

भूमि पर आसन लगाकर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएँ। दोनों हथेलियों के पंजो को शेर की भाँति तानकर दोनों घुटनों पर रखिए। जीभ को बाहर निकालिए, आँखो को शेर की आँखों की भाँति फैलाइए। पूरक साँस खींचकर गले से निकालते हुए सिंह की भाँति गुर्राइए।

दूसरी विधि –

भूमि पर आसन बिछाकर उगते हुए सूर्य की ओर वज्रासन लगाकर बैठ जाइए। दोनों हथेलियों को कमर के सामने की ओर झुकाइए। गर्दन को इस प्रकार उठाएँ, जैसे शेर बैठकर दहाड़ने के समय उठाता है। मुँह खोल कर जीभ को बाहर निकालें और उसे बाहर की ओर लटका लीजिए। सूर्य के प्रकाश को मुँह के अन्दर जाने दीजिए। आंखे बंद कीजिए। नाक से साँस लेकर आन्तरिक कुम्भक लगाइए। जितनी देर साँस रोक सकते हैं रोकिए। अन्त में गले से शेर के समान दहाड़ लगाइए।
सिंहासन की कोई भी विधि प्रारम्भ में दो बार, बाद में दस बार तक की जाती है। प्रत्येक कुम्भक बीच थोड़ा रूक-रूककर आराम करें।

ध्यान-

इस आसन में गलें के मध्य हृदय के बीच ध्यान लगाइए।

लाभ-

इस आसन से नाक, कान, गले आदि के रोग ठीक होते हैं, टांसिल ठीक होता है। कंठ, पिंडली, घुटने, उंगलियों में सुडौलता और सुदृढ़ता आती है।

सावधानियाँ-

  1.  यह आसन पूर्व दिशा की ओर मुँह करके लगाइए।
  2.  जीभ यथा सम्भव बाहर निकालिए। दहाड़ने में पूर्ण शक्ति से काम लीजिए ।

1 thought on “सिंहासन | Sinhaasan”

  1. Pingback: योगासन सीखें | Learn yoga - Hamar Hindi

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
Scroll to Top