सेहत अच्छी के लिए जाने डाइट | Know Diet for Good Health

अच्छी सेहत के लिए दुनिया भर में कई तरह की डाइट अपनाई जा रही है। इन दिनों वनस्पति आधारित डाइट की काफी मांग है। क्या हैं इसके फायदे व नुकसान और कैसे इसे संतुलित ढंग से अजमाया जा सकता हैै।
इम्युनिटी की बात इन दिनों बहुुत की जा रही है। दिल और हड्डीओं की सेहत को लेकर भी लोग बहुत चितिंत हैं। ऐसे में वे कई तरह की डाइट आजमा रहे हैं। इनमें वीगन और वनस्पित आधारित डाइट काफी लोकप्रिय हैं। वीगन डाइट में जहां पशुओं से मिलने वाले प्रोटीन को नजरअंदाज किया जाता है, वहीं वनस्पति आधारित डाइट में जहां थोड़ी बहुत मात्र में इसे ले सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इसमें शरीर को जरूरी प्रोटीन, फाइबर व मिनरल मिल जाते हैं। इसीलिए विशेषज्ञ इसे पूर्ण पोषण देने वाली डाइट मानते हैं।

वनस्पति आधारित डाइट
इसमें वे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो सब्जियों, अनाज, फलों और पेड़-पौधों से प्राप्त होते हैं। इसमें बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को संतुलित रखने और कोलेस्ट्राल स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। कई गंभीर रोगों जैसे डायबिटीज, हृदय रोगों व कई तरह के कैंसरों का खतरा भी कम किया जा सकता है। ऐेेेेेेसा माना जा रहा है कि यह मीट या पशु आधारित डाइट से बेहतर है।

सेहत और इम्युनिटी पर प्रभाव
वनस्पति आधारित डाइट में फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन सी और ई, आयरन और फाइटोकेमिकल्स के अलावा फोलिक एसिड भरपूर पाए जाते हैं। इसमें कम कैलोरी, सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्राल होता है। हमारे इम्यून सिस्टम में टी सेल्स सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक हैं, जिन्हें टी लिम्फोसाइट्स कहा जाता है। टी-सेल्स इम्युनिटी सिस्टम में जरूरी भूमिका निभाते हैं और खतरनाक पैथेजंस के खिलाफ शरीर का बचाव करने में सहायक हैं। पैथोजंस से कई और बीमारियां होती हैं। फल और सब्जियों में कैरोटिनॉयड और फ्रलेवोनॉयड्स जैसे एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं। सब्जियों और अनाज में एंटीवायरल क्षमताएं होती है। वे टी-सेल्स सहित कुछ इम्युनिटी सेल्स एक्टिविटी को भी बढ़ाती हैं।

इसके कई फायदे हैं

  • वजन कम करने में मदद मिलती है।
  • इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। इसमें मैक्रोन्यूट्रिएंटस, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटी-आक्सीडेंट्स की भरपूर मात्र होती है, जिसमें वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद मिलती है। कई क्रोनिक बीमारियों, जैसे दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर और टाइप टू डायबिटीज को भी नियंत्रित रखा जा सकता है। एंटी-ऑक्सीडेंट्स तनाव का फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।
  • इस डाइट में फाइबर भरपूर होता है, जिससे पाचन क्षमता अच्छी रहती है। इनमें मौजूद ओमेगा-3 से शरीर की अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
  • इससे प्राटीन सेल्स को सक्रिय रखने में भी मदद मिलती है और शरीर की संक्रमण से लडने की क्षमता बढ़ती है। मटर, फलियां दालें आदि प्रोटीन के बेहतरीन स्त्रेत हैं। बीजों नट्स आदि में जिंक की बहुतायत होती है, जे इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है। इनमें मिलने वाला मैग्नीशियम सेरोटोनिन को बढ़ाता है, जिसमें मन प्रसन्न रहता है।

नुकसान भी हो सकता है
कई लोग अचानक पशुओं से मिलने वाले प्रोटीन, मांसाहार और दुग्ध उत्पादों का सेवन छोड़ देते हैं। दुग्ध उत्पाद शरीर के विकास के लिए जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर गर्भवती स्त्री अचानक इनका सेवन छोड़ दे तो शिशु में मस्तिष्क पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। संतुलित भोजन प्रणाली में हर पोषक तत्व की अहमियत होती है। जैसे, एक तत्व है-कॉलीन जो फल व सब्जियों में कम मिलता है, लेकिन इसका मानसिक सेहत में बड़ा योगदान है। वह अंडे, दुग्ध उत्पादों और मछली में भरपूर होता है।

वनस्पति आधारित डाइट में क्या खाएं
फल -सेब, केला, अंगूर, स्ट्राबेरी और सभी खट्टे फल
सब्जियां -मिर्च मक्का, मटर लेट्यूस, पालक, केल, एवोकाडो आदि
कंद-मूल -जड़ों वाली सब्जियां जैसे आलू, गाजर, मूली, शकरकन्द, चुकन्दर आदि
साबुत अनाज -अनाज और अन्य स्टार्च अपने पूरे रूप में, जैसे किनुआ, ब्राउन राइस, बाजरा, गेहूं, जई, जौ, मक्का आदि

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