भारत के पवित्र नदियॉ एवं सरोवर | Sacred Rivers and Lakes of India

भारत के पवित्र नदियॉ

1. गंगा
2. यमुना
3. सिंधु
4. सरस्वती
5. गण्डकी
6. ब्रह्मपुत्र
7. रेवा (नर्मंदा)
8. गोदावरी
9. कृष्णा
10. कावेरी
11. महानदी

गंगा
गंगा भारत की पवित्रतम नदी है। सूर्यवंशी राजा भगीरथ इसे धरती पर लायें।
उदगम स्थल- उत्तर काशी जिले में गंगेात्री शिखर पर गोमुख।
गंगा किनारे प्रमुख स्थल- ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग, काशी, पाटलीपुत्र आदि।
गोमुख से गंगासागर तक इसकी लम्बाई 1450 कि0मी0 है।

यमुना
यमुना का उदगम स्थल यमनोत्री शिखर है।
यमुना किनारे प्रमुख स्थल- दिल्ली, मथुरा, वृन्दावन, आगरा।
यह गंगा के समानान्तर बहते हुए प्रयाग में जाकर गंगा से मिल जाती है तथा गंगा के साथ-साथ गंगासागर तक जाती है।

सिंधु
सिंधु नदी भारतवर्ष की ही नहीं विश्व की विशाल नदी है।
उदगम स्थल- तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर के पास है।
बहाव- तिब्बत में 250 कि0मी0।
जम्मू कश्मीर में 550 कि0मी0।
शेष 2380 कि0मी0 पाकिस्तान में। कुल लम्बाई 3180 कि0मी0।
वैदिक संस्कृति का विकास इसी के किनारे हुआ। मोहनजोदडो व हड़प्पा संस्कृति इसी के किनारे थी।

सरस्वती
उदगम स्थल- हिमालय
बहाव- हरियाणा, राजस्थान, गुजरात होती हुई सिंधु सागर (अरब सागर) में मिलती है। वर्तमान में यह ऊपर से विलुप्त हो गई है। लेकिन आज भी हरियाणा और राजस्थान प्रदेशों में अन्दर ही अन्दर प्रवाहित होने की खोज मिल रहीं है।

गण्डकी
उदगम स्थल- नेपाल में मुक्तिनाथ से थोड़ा आगे दामोदर कुण्ड से निकलती है।
बहाव- बिहार राज्य में प्रवेश करती है और गंगा में मिल जाती है। इस नदी में प्राकृतिक और
विभिन्न स्वरूप वाले शालिग्राम प्राप्त होते है।

ब्रह्मपुत्र
उदगम स्थल- पवित्र मानसरोवर के पास एक विशाल हिमानी है।
बहाव- तेजपुर, गुवाहाटी, डिब्रुगढ़, शिवसागर आदि।
तिब्बत में इसको सांपो तथा अरूणाचल व असम में इसे लोहित कहा जाता है।
इसकी लम्बाई- 2900 कि0मी0 है।

नर्मदा
उदगम स्थल- अमरकंटक से निकलकर अरब सागर तक।
बहाव- ओंकारेश्वर, मान्धाता, शुक्ल तीर्थ, भेड़घाट, जबलपुर, कपिलधारा आदि। सती अनुसूया का मन्दिर भी पास ही बना है।
इसकी लम्बाई- 1300 कि0मी0 है।

गोदावरी
उदगम स्थल- ब्रह्मगिरी (त्रयंबकेश्वर, नासिक) से निकलकर गंगासागर में मिलती है।
बहाव- पंचवटी, पैठण, राजमहेन्द्री, भद्राचलम, नान्देड़, कोटा, पल्ली आदि। यह दक्षिण भारत की गंगा भी कहलाती है।
इसकी लम्बाई- 1450 कि0मी है।

कृष्णा
उदगम स्थल- सह्याद्रि पर्वत माला में महाबलेश्वर के उत्तर में स्थित कराड नामक स्थान से निकलकर गंगासागर मे मिलती है।
बहाव- सतारा, सांगली, रायचूर, विजयवाड़ा, नागार्जुन सागर।
इसकी लम्बाई- 1280 कि0मी0 है।

कावेरी
उदगम स्थल- कुर्ग जिले (सह्याद्रि पर्वत) से निकलकर सागर मे मिलती है।
बहाव- श्रीरंगपत्तन, शिव समुद्रम, श्रीरंगम, तंजाबूर, कुंभकोणम, त्रिचिरापल्ली।
इसकी लम्बाई- 800 कि0मी0 है।

महानदी
उदगम स्थल- रायपुर जिले (मध्यप्रदेश) के दक्षिण पूर्व में सिंघावा पर्वत से निकलकर उडीसा में कटक के पास सागर में मिलती है।
बहाव- रायपुर, बस्तर, बिलासपुर आदि।
इसकी लम्बाई- 860 कि0मी0 है।
विश्व का सबसे लंबा बांध हीराकुण्ड महानदी पर ही बना है।

भारत के पंच सरोवर
1. बिन्दु सरोवर
2. नारायण सरोवर
3. पम्पा सरोवर
4. पुष्कर झील
5. मानसरोवर

बिन्दु सरोवर
बिन्दु सरोवर दो है
1. भुवनेश्वर के बाजार में स्थित। यह एकाग्रता की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है। सरोवर के मध्य एक विशाल मन्दिर है इसमें समस्त तीर्थो का जल लाकर डाला हुआ है।
2. सिद्धपुर में स्थित इसकी मान्यता मातृ श्राद्ध के लिये सर्वाधिक है। अतः इसे मातृ गया भी कहा जाता है।

नारायण सरोवर
कच्छ के रन में यह अति प्राचीन तीर्थ क्षेत्र है। इसका निर्माण गंगोत्री से पवित्र जल लाकर किया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां एक बड़ा मेला लगता है। सरोवर के पास गोवर्धन नाथ, आदि नारायण तथा कोटेश्वर महादेव के मन्दिर है।

पम्पा सरोवर
तुंगभद्र नदी के दक्षिण में यह सरोवर स्थित है। दक्षिण भारत में जाते समय भगवान श्री राम ने इस सरोवर के किनारे विश्राम किया था। इसके पास ही शबरी गुफा भी स्थित है तथा पास की पहाडी पर कई छोटे – छोटे मन्दिर है।

पुष्कर झील
राजस्थान में स्थित पुष्कर झील सबसे अधिक पवित्र मानी जाती है। कहते है ब्रह्मा जी ने पुष्कर की स्थापना की थी। अतः सरोवर के निकट ब्रह्मा जी का विशाल भव्य मन्दिर है। यहां लगभग 400 मन्दिर है। इसलिये पुष्कर को मन्दिरों की नगरी कहा जाता है। यहां पर ब्रह्मा जी के मन्दिर के अतिरिक्त बद्रीनारायण मन्दिर, वाराह मन्दिर, कपालेश्वर महादेव मन्दिर तथा श्री रंग मन्दिर आदि प्रमुख है।

मानसरोवर
यह तिब्बत के शीतल पठार में स्थित है। इसका जल अत्यन्त स्वच्छ है। इसका आकार अंडाकार है। सरयू और ब्रह्मपुत्र का उद्गम स्थल मानसरोवर को ही माना जाता है। पास में ही गौरी कुण्ड है। कहते है कि सती की दाहिनी हथेली यहां गिरी थी।
अतः इसकी मान्यता शक्ति पीठ के रूप में भी है।

भारत के सप्त पर्वत
1. हिमालय पर्वत
2. अरावली पर्वत
3. विन्ध्याचल पर्वत
4. रैवतक पर्वत
5. महेन्द्र पर्वत
6. मलय पर्वत
7. सह्याद्रि पर्वत

हिमालय पर्वत

  • यह विश्व का सबसे ऊॅचा पर्वत है। जिसमें देवी – देवताओं का वास है।
  • पवित्र नदियों का उद्गम स्थल है।
  • बद्रीनाथ, केदारनाथ, कैलाश, मानसरोवर, वैष्णो देवी, अमरनाथ आदि पुण्य स्थल इसी पर है।
  • भारत में 2400 कि0मी0 लम्बाई व 160 से 400 कि0मी0 चैडाई में स्थित है।

अरावली पर्वत

  • दिल्ली के दक्षिण सिरे से प्रारम्भ होकर हरियाणा, राजस्थान व गुजरात तक यह पर्वतमाला फैली हुई है।
  • यह पर्वत महाराणा प्रताप के उत्सर्ग, कर्तृत्व तथा शौर्य का साक्षी है।
  • यह विश्व के प्राचीन पर्वतों में से एक है।

विन्ध्याचल पर्वत

  • मध्यवर्ती भाग में गुजरात से लेकर बिहार उत्कल तक फैला है।
  • यह 40 हजार वर्ग मील क्षेत्र में फैला है। इसकी लम्बाई 100 कि0मी0 तथा औसत ऊॅचाई 700 मी0 है।
  • चम्बल, बेतवा, केन, क्षिप्रा, बनास, सोन नदियों का उद्गम स्थल है। उज्जैयनी, जबलपुर, विन्ध्यवासिनी (मिर्जापुर), महाकाली मन्दिर (कालीखोह) तथा अष्टभुजा देवी आदि तीर्थ स्थल इसी में है।

रैवतक पर्वत (गिरनार)

  • गुजरात प्रान्त के काठियावाड़ जिले में यह पर्वत माला स्थित है।
  • भगवान शंकर ने भी यहॉ निवास किया था।
  • जैन सम्प्रदाय का पवित्र स्थल मृत्युन्जय  या पालिताना यहीं है।
  • सोमनाथ ज्योर्तिलिंग यहां से थोड़ी दूर ही स्थित है।

महेन्द्र पर्वत

  • यह उडीसा का एक प्रमुख पर्वत है। जो गंजाम जिले में है।
  • समुद्र तल से इसकी ऊॅचाई 1500 मी0 है।
  • गोकणेश्वर मन्दिर यहां का सबसे प्रमुख मन्दिर है।
  • भगवान परशुराम का आवास इसी पर्वत पर है।

मलय पर्वत (नीलगिरी पर्वत)

  • कर्नाटक के दक्षिण भाग तथा तमिलनाडु में यह पर्वत फैला है।
  • यहां पर चंदन के सघन वन है।
  • अनेक ऋषियों की यह तपस्या स्थल है।
  • यहॉ पर अनेक औषधियों तथा मसालों की कृषि भी होती है।

सह्याद्री पर्वत

  • भारत के पश्चिमी तट के साथ गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक राज्य में मलय पर्वत का विस्तार है।
  • गोदावरी, कृष्णा, कावेरी का उद्गम स्थल इसी पर्वत माला में है।
  • त्र्यम्बकेश्वर, महाबलेश्वर, भीमशंकर, ब्रह्मगिरी, भगवती भवानी, बौद्ध चैत्य प्रसिद्ध तीर्थस्थल इसी क्षेत्र में है।
  • शिवाजी महाराज की समाधी भी इसी पर्वत माला पर है।
  • ब्रह्मा जी ने सृष्टि के प्रारम्भ में यहां पर यज्ञ किया था।

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