आयुर्वेद में है कॉलेस्ट्रोल का समाधान | Cholesterol solution in Ayurveda

हमारे जीवन में हृदय रोग अव्‍यवस्थित जीवन-शैली की उपज है। Cholesterol, हृदय रोग आज न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया भर में चुनौती बन गया है। हालांकि इसका इलाज लगभग हर एलोपैथि एवं आयुर्वेद में हर जगह शुलभ से उपलब्‍ध् है। आज हम बात करेंगे हृदय में होने वाली विसंगतियों के बारे में, और उसमें आयुर्वेद कितना कारगर साबित होते हैं उसके बारे में। हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण कॉलेस्ट्रोल का बढ़ना माना जाता है। आयुर्वेदाचार्य हदय रोग का मुख्य कारण अव्यवस्थित जीवनशैली, रात के बजाय दिन में नींद लेना, पिज्जा-बर्गर संस्कृति, तनाव, चिंता आदि को मानते हैं। आयुर्वेद विज्ञान ने सात प्रकार के हृदय रोग का वर्णन किया है जिनमें से एक है मेद सूत्र। जब हृदयकोष्ठगत (हार्ट चेंबर) में मेद के कणों का संचयन हो जाता है तो उस स्थिति को मेद सूत्र रोग कहते हैं। इस रोग में नाड़ी की गति मंद हो जाती है। हृदय में कंपन, अवसाद भ्रम, हृदय मांसपेशियों के स्नायु का बल क्षीण होता है, जिससे मृत्यु भी हो जाती है।

इसके लिए आयुर्वेदाचार्य रोगी को सबसे पहले काउंसिलिंग करने पर बल देते हैं। उनका कहना है कि कई बार लोग यह सोच कर भी तनाव में आ जाते हैं कि उन्हें हृदय रोग हो गया है। इससे वह अपने आपको और ज्यादा बीमार कर लेते हैं और उनका मनोबल गिर जाता है, इसलिए काउंसिलिंग जरूरी है। काउंसिलिंग न सिर्फ हृदय रोगी का, बल्कि किसी भी रोगी की जरूरत है। आप चाहे खुशी में हों अथवा दुःख में, हर अवस्था में हृदय का स्पंदन बढ़ जाता है। कई बार यह स्थायी रूप ले लेता है। आयुर्वेद के मुताबिक Cholesterol का बढ़ना मेद धातु पर निर्भर करता है। मेद धातु की दुष्टि, मेद की अस्वाभाविक वृद्धि से Cholesterol अव्यवस्थित रूप से बढ़ता है। वसा का पाचन जठराग्नि के बल पर निर्भर करता है। यकृत (लिवर) में स्थित अग्नि शरीर के लिए उपयोगी मात्रा में वसा एवं Cholesterol का निर्माण करती है। हालांकि कुछ लोगों में हार्मोन के दुष्प्रभाव से भी कॉलेस्ट्रोल ज्यादा बनने लगता है। आयुर्वेद में चिकित्सा का सर्वप्रथम सिद्धांत है कि जिन कारणों से रोग की उत्पत्ति हो उनका परित्याग किया जाए।

हृदय रोगों से बचने के मुख्‍य आहार एवं व्‍यायाम  

कुल्थी, अरहर के बीज, परवल तथा आमल का प्रयोग भोजन में करना चाहिए। व्यायाम एवं मानसिक परिश्रम बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही कई आयुर्वेदिक औषिधियां हैं, जो चिकित्सकों की देख-रेख में ली जाती है।

आयुर्वेद में है कॉलेस्ट्रोल का समाधान | Cholesterol solution in Ayurveda
अर्जुन वृक्ष

आयुर्वेदाचार्य हदय रोगी को सबसे पहले खुली हवा में टहलने की सलाह देते हैं, खास कर उन जगहों पर जहां अर्जुन वृक्ष ज्यादा हैं। हृदय रोगी कुछ न लें, सिर्फ आधा घंटा ऐसे पार्को में टहलें जहां अर्जुन वृक्ष हैं तो उनका आधा दुःख ऐसे ही दूर हो जाएगा। वह रोगी को अर्जुन की छाल को सुखाकर-पीसकर एक चम्मच पाउडर दूध के साथ लेने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही नागार्जुनारिष्ट, अर्जुनारिष्ट, अर्जुन क्षीरपाक आदि चिकित्सकों के निर्देशन में लेने की सलाह देते हैं।

अपनी आदतों में बदलाव करके भी बहुत हद तक बचा जा सकता है

  • खानपान की आदतों में बदलाव करके हृदय रोग से बचा जा सकता है।
  • दिनचर्या नियमित करें।
  • शारीरिक एवं मानसिक संतुलन स्‍थापित करें।
  • अधिक मात्रा में भोजन नहीं करना चाहिए।

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