रामायण के बारे में चौंकाने वाला साक्ष्‍य जिसे जानकर हो जायेंगे हैरान | Shocking facts about Ramayana that will surprise you

दोस्‍तो आप सभी ने पौराणिक कथा रामायाण के बारे में तो सुना ही होगा। जिसके साक्ष्‍य के बारे में आज हम बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में जानकर आपके बहुत ही आश्‍चर्य होगा और आप रोमांचित भी होंगे। रामायण काल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। नासा द्वारा समुद्र में खोजा गया रामसेतु जो आज भी रामायण काल के साक्ष्‍य होने का प्रमाण है। जिसको जानकर आपको रामायण काल कि घटना को सत्‍य होने का प्रमाण मिलता है। हम आपको यहाँ पर उन साक्ष्यों के बारे में बताएँगे जिससे सिद्ध हो जाएगा की रामायण कोई झूठी रचना नहीं है। 

वैज्ञानिकों के ये 5 साक्ष्य जो आपको रामायण काल के अस्तित्व को स्वीकारने पर मजबूर कर देंगे

दशानन रावण का महल

दशानन रावण की सोने की लंका का निर्माण शिवजी ने माता पार्वती के रहने के लिए करवाया था। जो देवशिल्पी विश्‍वकर्मा के हाथों संपन्न हुआ था। लेकिन जब शिव ने महल में गृहप्रवेश हेतु महापंडित रावण को बुलाया उसने गृहप्रवेश के उपरांत दक्षिणा स्वरूप शिवजी से छल से सोने की लंका को हीं मांग लिया जिसको शिवजी ने मना नहीं कर सके।

श्रीलंका स्थित रावण की लंका, त्रिकुटाचल पर्वत पर बनी थी। जो तीन पर्वतों के श्रृंखला के साथ श्रृंखलाबद्ध है। इसमें पहला पर्वत सुबेल था जहां रामायण का युद्ध पूर्ण हुआ था। दूसरा पर्वत का नाम नील था जहां पर सोने की लंका स्थापित थी और तीसरा पर्वत सुन्दर पर्वत जहां अशोक वाटिका स्थित थी। यह वाटिका एलिया पर्वतीय क्षेत्र की गुफा में स्थित है, जहां रावण ने सीता को बंधक बना कर रखा था।

रामायण के बारे में चौंकाने वाला साक्ष्‍य जिसे जानकर हो जायेंगे हैरान | Shocking facts about Ramayana that will surprise you
दशानन रावण का महल

रावण की लंका का यह इतिहास पिछले त्रेतायुग से यूं ही चला आ रहा है। मगर समय के साथ जब अनुसंधान कर्ता वहां रिसर्च के लिए पहुंचे, तो उनको वहां अद्भुत प्रमाण मिले जिनमें पहला यह है कि रावण ने चार हवाई अड्डे बनवाये थे। जिनके नाम है उसानगोडा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वरियापोला।

जैसा की रावण वध की कथा व उसके साम्राज्य के पतन की कथा के बारे में सभी जानते हैं कि जब रावण ने सीता जी का हरण कर उन्हें लंका में रखा था तब भगवान राम ने सीता जी को बचाने हेतु एक योजना का निर्माण किया। इस योजना में सर्वप्रथम राम ने रावण को क्षमा मंगवाने के लिए हनुमान के हाथों प्रस्ताव भेजा। मगर रावण ने अपने अहम के कारण प्रस्ताव को ठुकराकर, महावली हनुमान की पूंछ में आग लगा दी। हनुमान ने अपनी पूंछ से पूरी लंका को जला कर राख कर दिया जिसको देखकर लंका वासी भयभीत हो गये थे।

 

सुग्रीव गुफा

रामायण में जिस ऋष्यमूक पर्वत का उल्लेख है, वह कर्नाटक प्रदेश के हम्पी में है। हम्पी कभी प्रसिद्ध विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था। यहीं पर वानरराज सुग्रीव और बाली की राजधानी किष्किन्धा नगरी बसी थी। हम्पी और आसपास के क्षेत्र में आज भी रामायण के विभिन्न प्रसंगों से जुड़े कई स्थल यहां रामजी के आगमन के साक्षी हैं। यहां स्थित ऋष्यमूक पर्वत पर आज भी वो सुग्रीव गुफा विद्यमान है।

रामायण की एक कहानी के अनुसार वानरराज बाली ने दुंदुभि नामक राक्षस को मारकर उसका शरीर एक योजन दूर फेंक दिया था। हवा में उड़ते हुए दुंदुभि के रक्त की कुछ बूंदें मातंग ऋषि के आश्रम में गिर गईं। ऋषि ने अपने तपोबल से जान लिया कि यह करतूत किसकी है।

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सुग्रीव गुफा

क्रुद्ध ऋषि ने बाली को शाप दिया कि यदि वह कभी भी ऋष्यमूक पर्वत के एक योजन क्षेत्र में आएगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। यह बात उसके छोटे भाई सुग्रीव को ज्ञात थी और इसी कारण से जब बाली ने उसे प्रताड़ित कर अपने राज्य से निष्कासित किया तो वह इसी पर्वत पर एक कंदरा में अपने मंत्रियों समेत रहने लगा। यहीं उसकी राम और लक्ष्मण से भेंट हुई और बाद में राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य मिला।

सुग्रीव जिस गुफा में रहे, वहां आज उनका एक विग्रह स्थापित है, जिसकी पूजा की जाती है। तुंगभद्रा नदी के तट पर बसा यह क्षेत्र बहुत ही मनोरम है। यहां आज भी ऐसा प्रतीत होता है, जैसे रामायण के कालखंड में आ गए हों। यहां के भौगोलिक परिदृश्य में आज भी अधिक परिवर्तन नहीं आया है।

 

अशोक वाटिका

रामायण में वर्णित अशोक वाटिका लंका में स्थित है, जहां रावण ने सीता को हरण करने के पश्चात बंधक बनाकर रखा था। ऐसा माना जाता है कि एलिया पर्वतीय क्षेत्र की एक गुफा में सीता माता को रखा गया था, जिसे ‘सीता एलिया’ नाम से जाना जाता है। यहां सीता माता के नाम पर एक मंदिर भी है।

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अशोक वाटिका

यहीं पर आंजनेय हनुमान ने निशानी के रूप में राम की अंगूठी सीता को सौंपी थी। ऐसा माना जाता है कि अशोक वाटिका में नाम अनुरूप अशोक के वृक्ष काफी मात्रा में थे। राम की विरह वेदना से दग्ध सीता अपनी इहलीला समाप्त कर लेना चाहती थीं। वे चाहती थीं कि अग्नि मिल जाए तो वे खुद को अग्नि को समर्पित कर दें। इतना ही नहीं उन्होंने नूतन कोंपलों से युक्त अशोक के वृक्षों से भी अग्नि की मांग की थी।

तुलसीदास जी ने लिखा भी है- ‘नूतन किसलय अनल समाना, देहि अगिनि जन करहि निदाना’। अर्थात तेरे नए पत्ते अग्नि के समान हैं। अत: मुझे अग्नि प्रदान कर और मेरे दुख का शमन कर।

 

रामसेतु

रामायण में जिस रामसेतु का वर्णन है जिसे अंग्रेजी में एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, भारत के तमिलनाडु के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य चूना पत्थर से बनी एक श्रृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत तथा श्रीलंका को भू-मार्ग से आपस में जोड़ता था। यह पुल करीब 18 मील (30 किलोमीटर) लंबा है।

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रामसेतु

 

ऐसा माना जाता है कि 15वीं शताब्दी तक पैदल पार करने योग्य था। एक चक्रवात के कारण यह पुल अपने पूर्व स्वरूप में नहीं रहा। रामसेतु एक बार फिर तब सुर्खियों में आया था, जब नासा के उपग्रह द्वारा लिए गए चित्र मीडिया में सुर्खियां बने थे।

समुद्र पर सेतु के निर्माण को राम दूसरी बड़ी रणनीतिक जीत कहा जा सकता है, क्योंकि समुद्र की तरफ से रावण को कोई खतरा नहीं था और उसे विश्वास था कि इस विराट समुद्र को पार कोई भी उसे चुनौती नहीं दे सकता।

 

रामायण कालीन हवाईअड्डे

जी हाँ दोस्तों, रावण के रामायण कालीन ४ हवाईअड्डे खोजने का दावा किया है श्रीलंका की रामायण अनुसन्धान कमेटी ने। पिछले 9 वर्षों से ये कमेटी श्री लंका का कोना कोना छान रही थी जिसके तहत कई छुटपुट जानकारी व अवशेष भी मिलते रहे परन्तु पिछले 4 सालो में लंका के दुर्गम स्थानों में की गई खोज के दौरान रावण के 4 हवाईअड्डे हाथ लगे है।

कमेटी के अध्यक्ष अशोक केंथ का कहना है की रामायण में वर्णित लंका वास्तव में श्रीलंका ही है जहाँ उसानगोडा, गुरुलोपोथा , तोतुपोलाकंदा तथा वरियापोला नामक चार हवाईअड्डे मिले है। उसानगोडा रावण का निजी हवाईअड्डा था तथा यहाँ का रनवे लाल रंग का है। इसके आसपास की जमीं कहीं काली तो कहीं हरी घास वाली है। जब हनुमान जी सीता जी की खोज में लंका गये तो वहां से लौटते समय उन्होंने रावण के निजी उसानगोडा को नष्ट कर दिया था।

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रामायण कालीन हवाईअड्डे

आगे केंथ ने बताया की अब तक उनकी टीम ने लंका के 50 दुर्गम स्थानों की खोज की है। इससे पूर्व पंजाब के अशोक केंथ सन 2004 में लंका में स्थित अशोक वाटिका खोजने के कारण्‍ सुर्खियों में आये थे ।

तत्पश्चात श्रीलंका सरकार ने 2007 में ‘श्री रामायण अनुसन्धान कमेटी’ का गठन किया तथा केंथ को इसका अध्यक्ष बनाया था ।

श्री रामायण अनुसन्धान कमेटी के मुख्य सदस्य – इस कमिटी में श्रीलंका के पर्यटन मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल क्लाइव सिलबम, आस्ट्रेलिया के हेरिक बाक्सी, लंका के पीवाई सुदेशम, जर्मनी के उर्सला मुलर, इंग्लॅण्ड की हिमी जायज शामिल है।

 

खोज में अबतक क्या क्‍या मिला

अशोक वाटिका, रावण के 4 हवाईअड्डे : उसानगोडा, गुरुलोपोथा,  तोतुपोलाकंदा,  वरियापोला, रावण का महल, विभीषण का महल आदि।

ये स्थान व् हवाईअड्डे आदि कितने पुराने? वेद विज्ञानं मंडल, पुणे के डा० वर्तक जी ने वालमिकी रामायण में वर्णित ग्रहों नक्षत्रों की स्थति (astronomical calculations) तथा उन्ही ग्रहों नक्षत्रों की वर्तमान स्थति पर गहन शोध कर रामायण काल को लगभग 7323 ईसा पूर्व अर्थात आज से लगभग 9336 वर्ष पूर्व का बताया है।

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